दमोह। नागपंचमी पर्व के अवसर पर वन विभाग ने सर्पों के संरक्षण और उनके अवैध प्रदर्शन पर रोक लगाने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया। डीएफओ एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी दमोह के निर्देशन में वन विभाग की टीम ने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए सपेरों के कब्जे से सर्पों को रेस्क्यू किया।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नागपंचमी के दौरान कुछ सपेरे सर्पों को पकड़कर उनके प्रदर्शन के लिए लोगों के बीच लेकर आते हैं। वन्यजीवों को पकड़कर रखना और उनका प्रदर्शन करना नियमों के विपरीत है। इसी को देखते हुए वन विभाग की टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई की।
अभियान के दौरान रेस्क्यू किए गए सर्पों को सुरक्षित तरीके से कब्जे में लिया गया। इसके बाद सभी सर्पों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। परीक्षण के बाद सर्पों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उनके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया गया।
वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि नागपंचमी के अवसर पर सर्पों को खरीदने या सपेरों से उनका प्रदर्शन कराने से बचें। अधिकारियों ने कहा कि सर्प वन्यजीव हैं और उन्हें पकड़कर रखना या प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
वन विभाग ने लोगों से यह भी अपील की कि घर, दुकान, खेत या किसी अन्य स्थान पर सर्प दिखाई देने पर घबराकर उसे मारने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू दल को सूचना देकर सुरक्षित तरीके से सर्प को रेस्क्यू कराया जा सकता है।
रेस्क्यू टीम ने लोगों को समझाया कि सर्पों को लंबे समय तक कैद में रखना, उनके साथ छेड़छाड़ करना और प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करना उनके स्वास्थ्य और जीवन के लिए नुकसानदायक है। वन्यजीवों को पकड़कर रखना अथवा उनके साथ क्रूरता करना गंभीर मामला हो सकता है और संबंधित प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अभियान के दौरान काल भैरव एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन के संस्थापक प्रांशुल पारोचे, विनय अहिरवार, राज असाटी, ध्रुव चौरसिया और ओम सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा रेस्क्यू टीम के सदस्य मौजूद रहे।
वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किए गए सभी सर्पों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया। अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य नागपंचमी के दौरान सर्पों को होने वाले नुकसान को रोकना, वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और मानव-सर्प संघर्ष की घटनाओं को कम करना है।
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पों को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह या डर फैलाने के बजाय वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मदद लें। इससे सर्पों की सुरक्षा के साथ लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।
