भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार ने वित्त वर्ष 2027-28 के बजट में 74 बजटीय मदों को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इनमें मंत्रियों और विधायकों को मिलने वाले कई पुराने भत्ते भी शामिल हैं, जिनकी वर्तमान समय में उपयोगिता कम हो चुकी है।
बताया जा रहा है कि यह निर्णय वित्त मंत्रालय और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा 11 नवंबर 2025 को भेजे गए सुझावों के आधार पर लिया गया है। पत्र में राज्य की बजटीय व्यवस्था को राष्ट्रीय लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली के अनुरूप बनाने के लिए कई सुधारात्मक सुझाव दिए गए थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुझावों के अध्ययन के लिए राज्य के वित्त विभाग ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के बाद ऐसे बजटीय प्रावधानों को समाप्त करने की सिफारिश की, जो वर्तमान परिस्थितियों में अप्रासंगिक माने गए। सरकार ने समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आगामी बजट में इन मदों के लिए कोई बजटीय प्रावधान नहीं रखने का निर्णय लिया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार समाप्त किए गए 74 मदों में से 15 मद मंत्रियों और विधायकों के व्यक्तिगत एवं प्रशासनिक भुगतान से जुड़े हैं। इनमें आदिवासी क्षेत्र भत्ता, नगर क्षतिपूर्ति भत्ता, अवकाश यात्रा सुविधा (एलटीसी), त्योहार अग्रिम, प्रतिनियुक्ति भत्ता, भोजन भत्ता, धोबी एवं नाई खर्च, अनाज अग्रिम, संविदा कर्मचारियों का पारिश्रमिक भत्ता, महंगाई वेतन भत्ता और ग्रेड पे जैसे प्रावधान शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य बजट प्रबंधन को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और आधुनिक वित्तीय मानकों के अनुरूप बनाना है। अधिकारियों के अनुसार जिन मदों की अब आवश्यकता नहीं रही या जो वर्तमान व्यवस्था में अप्रासंगिक हो चुके हैं, उन्हें हटाकर बजटीय प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जाएगा।
राज्य सरकार के इस निर्णय को वित्तीय अनुशासन और बजट सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, इन बदलावों के प्रभाव और क्रियान्वयन की स्थिति आगामी बजट पेश होने के बाद और स्पष्ट होगी।
