दमोह। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की दवा व्यवस्था, स्टोर प्रबंधन और कर्मचारियों की उपस्थिति में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में दवाओं की कमी पाए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई बार दवाओं की मांग के लिए इंडेंट भेजे जाने के बावजूद समय पर आपूर्ति नहीं हो रही है, जिसके कारण मरीजों को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में जवाब मांगा और दवा उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अस्पताल के दवा स्टोर की जांच के दौरान भी अनियमितताएं सामने आईं। स्टॉक का मिलान करने पर 8 में से 6 दवाओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गईं। एमपी ई-औषधि पोर्टल पर दर्ज स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में अंतर मिलने पर कलेक्टर ने इसे गंभीर लापरवाही माना।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि वर्ष 2025 और 2026 के कई इंडेंट अब तक लंबित हैं। कलेक्टर ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित एमपी ई-औषधि पोर्टल का सही ढंग से उपयोग नहीं किया जा रहा है तथा स्टॉक की एंट्री और निकासी में डिजिटल प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाना गंभीर चूक है।
सुरक्षा व्यवस्था की जांच के दौरान स्टोर में रखे कई फ्रीजर खराब स्थिति में पाए गए, जिनमें दवाएं संग्रहित थीं। इसके अलावा कुछ एक्सपायरी दवाएं भी मौके पर मिलीं। कलेक्टर ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान 16 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। कलेक्टर ने उनके विरुद्ध तीन दिन का वेतन रोकने के आदेश जारी किए। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
