हाफ एनकाउंटर पर हाईकोर्ट के सवाल, CBI करेगी जांच; पुलिस की गाड़ी और फायरिंग पर उठे सवाल

लखनऊ बेंच ने श्रावस्ती के इकौना में मई 2025 में हुए कथित हाफ एनकाउंटर के घटनाक्रम पर कई सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपते हुए तत्कालीन SHO अश्विनी कुमार दुबे की शूटिंग और निशानेबाजी क्षमता की भी जांच के निर्देश दिए हैं।

लेखक: Damoh Daily News प्रकाशित:
हाफ एनकाउंटर पर हाईकोर्ट के सवाल, CBI करेगी जांच; पुलिस की गाड़ी और फायरिंग पर उठे सवाल

लखनऊ। श्रावस्ती के इकौना में मई 2025 में हुए कथित हाफ एनकाउंटर को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पुलिस के घटनाक्रम पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। साथ ही तत्कालीन थाना प्रभारी अश्विनी कुमार दुबे की शूटिंग और निशानेबाजी की क्षमता की जांच कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मामले की जांच CBI को सौंपते हुए कोर्ट ने तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

कोर्ट के सामने पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज घटनाक्रम को लेकर सबसे प्रमुख सवाल पुलिस टीम के वाहन से जुड़ा रहा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की एफआईआर में बताया गया था कि तत्कालीन SHO अश्विनी कुमार दुबे के साथ कुल 13 पुलिसकर्मी मौजूद थे। इनमें एक इंस्पेक्टर, पांच सब इंस्पेक्टर, एक हेड कांस्टेबल और छह कांस्टेबल शामिल बताए गए।

हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि इतने पुलिसकर्मी एक ही जीप में किस तरह सवार थे? कोर्ट के मुताबिक सामान्य जीप में 13 लोगों के बैठने की क्षमता नहीं होती। यहां तक कि पुलिस द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कई SUV और MUV में भी इतनी संख्या में लोगों के बैठने की जगह नहीं होती। ऐसे में यदि पुलिस टीम के पास एक से अधिक वाहन थे तो पुलिस रिकॉर्ड में उनका उल्लेख कहां है, यह भी जांच का विषय होगा।

मामले में फायरिंग की परिस्थितियों को लेकर भी कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी अलाउद्दीन को घेरने के लिए मौके पर कुल 23 पुलिसकर्मी मौजूद थे। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने पुलिस टीम को देखकर फायरिंग की और आत्मसमर्पण करने के लिए कहे जाने के बावजूद कथित तौर पर हथियार दोबारा लोड कर पुलिसकर्मियों को जान से मारने की धमकी दी।

इसके बाद पुलिस की ओर से जवाबी फायरिंग किए जाने की बात कही गई। हालांकि कोर्ट ने इस घटनाक्रम में यह पहलू भी महत्वपूर्ण माना कि कथित तौर पर 23 पुलिसकर्मियों से घिरे आरोपी की फायरिंग में किसी पुलिसकर्मी को गोली नहीं लगी। कोर्ट ने इसी तरह के विरोधाभासों को जांच के लिए महत्वपूर्ण माना है।

एनकाउंटर से जुड़ा एक और अहम बिंदु तत्कालीन SHO की गोली से संबंधित है। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार घटना रात करीब 11 बजे एक सुनसान स्थान पर हुई थी। दावा किया गया कि अश्विनी कुमार दुबे आरोपी से लगभग 15 मीटर की दूरी पर मौजूद थे।

पुलिस की एफआईआर में कहा गया कि SHO ने आरोपी के हथियार को दोबारा लोड किए जाने की आवाज सुनी और इसके बाद उन्होंने फायरिंग की। पुलिस के मुताबिक गोली आरोपी के दोनों पैरों में लगी थी।

अब हाईकोर्ट ने CBI को तत्कालीन SHO अश्विनी कुमार दुबे की शूटिंग और निशानेबाजी की क्षमता की भी जांच करने का निर्देश दिया है। इस जांच के जरिए यह भी देखा जाएगा कि पुलिस रिकॉर्ड में बताए गए घटनाक्रम और फायरिंग की परिस्थितियां वास्तविक रूप से संभव थीं या नहीं।

कोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले की जांच CBI करेगी। वाहन में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी, मौके पर पुलिस बल की संख्या, फायरिंग की परिस्थितियां और SHO की निशानेबाजी से जुड़े पहलुओं की जांच रिपोर्ट में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

फिलहाल हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में आगे की जांच CBI के हाथ में है। तीन महीने में रिपोर्ट पेश किए जाने के निर्देश के साथ मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित है।